अध्याय 10

प्रकाश : परावर्तन और अपवर्तन

Light Reflection and Refraction

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📖 अध्याय नोट्स

प्रकाश का परावर्तन (Reflection)

  • प्रकाश का किसी सतह से टकराकर वापस लौटना।
  • परावर्तन के नियम: आपतन कोण (i) = परावर्तन कोण (r)। आपतित, परावर्तित किरण और अभिलंब एक ही तल में होते हैं।

गोलीय दर्पण (Spherical Mirrors)

  • अवतल (Concave): परावर्तक पृष्ठ अंदर की ओर। वास्तविक और आभासी दोनों प्रतिबिंब बनाता है। दाढ़ी बनाने, कार की हेडलाइट में उपयोग।
  • उत्तल (Convex): परावर्तक पृष्ठ बाहर की ओर। हमेशा छोटा, सीधा और आभासी प्रतिबिंब। वाहनों के पश्च-दृश्य (Rear-view) दर्पण में।
दर्पण सूत्र: 1/f = 1/v + 1/u
आवर्धन (m) = h'/h = -v/u

प्रकाश का अपवर्तन (Refraction)

  • एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाने पर प्रकाश की दिशा बदलना। विरल से सघन → अभिलंब की ओर झुकती है।
  • स्नेल का नियम: sin i / sin r = स्थिरांक (अपवर्तनांक / Refractive Index)।

लेंस (Lenses)

  • उत्तल (Convex): अभिसारी (Converging), किनारों पर पतला। अवतल (Concave): अपसारी, किनारों पर मोटा।
लेंस सूत्र: 1/f = 1/v - 1/u
लेंस की क्षमता (Power): P = 1/f(m). SI = Dioptre (D)

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Quick Revision

  • अवतल दर्पण अभिसारी (Converging) दर्पण है।
  • फोकस दूरी (f) वक्रता त्रिज्या (R) की आधी होती है (f = R/2)।
  • हीरे का अपवर्तनांक 2.42 सबसे अधिक है।
  • लेंस की क्षमता P = 1/f मीटर में नापते हैं।
  • उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक (+) और अवतल की ऋणात्मक (-) होती है।
  • आभासी प्रतिबिंब हमेशा सीधे होते हैं।

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